गुमला जिले के बारे में

गुमला जिला 1983 में पुराने राँची जिले से अलग होकर अस्तित्व में आया। इसका इतिहास आदिवासी विरासत, प्राचीन राजवंशों, ब्रिटिश शासन और सामाजिक आंदोलनों से समृद्ध रहा है। मध्यकालीन समय में छोटानागपुर क्षेत्र पर नागवंशी राजवंश के राजाओं का शासन था और गुमला क्षेत्र में बराइक देवनंदन सिंह का शासन था। ब्रिटिश शासन के दौरान गुमला लोहरदगा जिले का हिस्सा था। वर्ष 1800 में यहाँ राज के विरुद्ध एक विद्रोह हुआ।

1807 में गुमला के पश्चिम स्थित बरवे क्षेत्र के उराँव लोगों ने श्रीनगर के अपने जमींदार की हत्या कर दी। इसके बाद यह विद्रोह गुमला के विभिन्न क्षेत्रों में फैल गया। वर्ष 1818 में बख्तर साय ने इस आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1843 में गुमला को बिशुनपुर प्रांत का हिस्सा बनाया गया। यह प्रांत 1899 में समाप्त कर दिया गया और बाद में इसका नाम राँची रखा गया। वर्ष 1902 में गुमला, राँची जिले का एक अनुमंडल बन गया।

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Scenic view of the district highlighting its cultural heritage

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